शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (MIET) ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, मेरठ ने पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले स्थित तपसिल जाति आदिवासी प्राक्तन सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह संगठन भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है। एमओयू हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित किया गया।
MoU पर (MIET)ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के वाइस चेयरमैन श्री पुनीत अग्रवाल तथा तपसिल जाति आदिवासी प्राक्तन सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र के सचिव श्री सौमेन कोले की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग का उद्देश्य शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास, सतत कृषि, उद्यमिता तथा ग्रामीण एवं आदिवासी विकास को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर (MIET)ग्रुप के ग्रुप डीन (आर एंड डी) प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार मिश्रा ने कहा कि यह साझेदारी शैक्षणिक संस्थानों और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले संगठनों के बीच सेतु का कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि एमओयू के तहत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार तथा ज्ञान का आदान–प्रदान किया जाएगा। साथ ही छात्रों को इंटर्नशिप, फील्ड एक्सपोज़र और व्यवहारिक शिक्षण के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
कार्यक्रम में एमआईईटी (MIET)ग्रुप के वाइस चेयरमैन श्री पुनीत अग्रवाल, ग्रुप डीन डॉ. सुनील कुमार मिश्रा, श्री सुशील कुमार शर्मा, प्राचार्य डॉ. हिमांशु शर्मा तथा सुश्री तनुश्री जैन भी उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि यह एमओयू आदिवासी, स्वदेशी एवं वंचित समुदायों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
तपसिल जाति आदिवासी प्राक्तन सैनिक कृषि विकास शिल्प केंद्र की नेशनल एडवाइजरी कमेटी के अध्यक्ष प्रो. पी.बी. शर्मा, सचिव श्री के.के. मिश्रा एवं मेंटर प्रो. आर.के. खंडाल का कार्यक्रम में शामिल होना प्रस्तावित था, किंतु पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं के कारण वे उपस्थित नहीं हो सके।
संगठन की ओर से उपाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र कुमार, सदस्य, राष्ट्रीय सलाहकार समिति (NAC) एवं परियोजना निदेशक, श्री मृदुल ताराफदर, मुख्य वित्त अधिकारी श्री पवन कुमार झा, प्रशासन एवं संचालन प्रमुख श्री जितेंद्र कुमार सहित अन्य पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने विश्वास जताया कि इस एमओयू से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
MoU के अंतर्गत दोनों संस्थान कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार, कौशल विकास एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यशालाएं, छात्र इंटर्नशिप तथा आदिवासी एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न पहलों पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
यह समझौता शिक्षा और नवाचार के माध्यम से अकादमिक संस्थानों और समुदाय के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा समावेशी और सतत विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।