विशेष राजनीतिक रिपोर्ट
दिल्ली की राजनीति में जब महिला नेतृत्व और जमीनी संघर्ष की बात होती है, तो पुष्पा सिंह का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है। दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में वे न केवल संगठन को मजबूती दे रही हैं, बल्कि राजधानी की लाखों महिलाओं के अधिकारों की बुलंद आवाज़ भी बन चुकी हैं। उनका राजनीतिक सफर साहस, समर्पण और निरंतर मेहनत की मिसाल है।
राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा के नेतृत्व में पुष्पा सिंह ने दिल्ली में महिला संगठन को नई ऊर्जा दी है। उनके मार्गदर्शन में महिलाओं को राजनीतिक रूप से जागरूक करने, उन्हें संगठन से जोड़ने और सामाजिक मुद्दों पर मजबूती से खड़ा करने का कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। पुष्पा सिंह इस नेतृत्व को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप देने वाली मजबूत कड़ी साबित हुई हैं।
दिल्ली में महिलाओं के लिए पुष्पा सिंह का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने घरेलू हिंसा, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया है। गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं को सरकारी सुविधाएं दिलाने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने अनेक अभियान चलाए। झुग्गी-बस्तियों से लेकर कॉलोनियों तक वे स्वयं जाकर महिलाओं से संवाद करती हैं और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाती हैं।
पुष्पा सिंह का राजनीति से जुड़ाव कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का परिणाम है। वे लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई हैं और संगठन के हर स्तर पर काम कर चुकी हैं। पार्टी के कठिन समय में भी उन्होंने कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा और जमीनी संघर्ष के माध्यम से संगठन को मजबूत बनाए रखा।
उनका सबसे मजबूत राजनीतिक आधार महरौली क्षेत्र रहा है, जहां वे लंबे समय तक पार्षद के रूप में जनसेवा करती रहीं। पार्षद रहते हुए उन्होंने सड़क, पानी, सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लगातार आवाज़ उठाई। स्थानीय लोग आज भी उन्हें एक सक्रिय और ईमानदार जनप्रतिनिधि के रूप में याद करते हैं, जिन्होंने हर समस्या को अपनी जिम्मेदारी समझा।
पुष्पा सिंह का राजनीतिक जीवन व्यक्तिगत संघर्ष से भी होकर गुज़रा है। उनके पति स्वर्गीय सतबीर सिंह दिल्ली के मेयर रह चुके थे और राजनीति में उनका बड़ा अनुभव रहा था। उनके निधन के बाद पुष्पा सिंह ने न केवल परिवार की जिम्मेदारी संभाली, बल्कि पूरी मजबूती से राजनीतिक मोर्चे पर भी डटी रहीं। उन्होंने अपने पति के अनुभव और जनसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जनता के बीच विश्वास कायम रखा।
विधायक चुनाव में भी पुष्पा सिंह ने पूरी ताकत से मुकाबला किया और कड़ी टक्कर दी। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका जनसमर्थन यह साबित करता है कि वे केवल संगठन की नेता नहीं, बल्कि जनता की सच्ची प्रतिनिधि हैं। उनके चुनावी अभियान में महिलाओं, युवाओं और गरीब वर्ग का उत्साह देखने लायक था।
पुष्पा सिंह की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत है उनकी जमीनी पकड़ और संवेदनशीलता। वे मंच से भाषण देने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि हर दुख-सुख में जनता के साथ खड़ी रहती हैं। किसी महिला को न्याय चाहिए हो, किसी परिवार को सहायता — वे हमेशा आगे रहती हैं।
आज दिल्ली महिला कांग्रेस को एक मजबूत संगठन बनाने में उनका योगदान निर्णायक साबित हो रहा है। वे महिलाओं को नेतृत्व के लिए तैयार कर रही हैं, उन्हें राजनीति में आगे लाने के अवसर दे रही हैं और समाज में बराबरी की लड़ाई को और तेज कर रही हैं।
पुष्पा सिंह का जीवन यह संदेश देता है कि संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, यदि इरादे मजबूत हों तो सफलता निश्चित होती है। वे दिल्ली की राजनीति में महिला शक्ति का प्रतीक बन चुकी हैं और आने वाले समय में उनका नेतृत्व और भी प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला है।
